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UPPCL का बैटरी स्टोरेज प्रोजेक्ट: झांसी में बनेगी 250 मेगावाट की बैटरी, बिजली सिस्टम होगा मजबूत

UPPCL का बैटरी स्टोरेज प्रोजेक्ट: झांसी में बनेगी 250 मेगावाट की बैटरी, बिजली सिस्टम होगा मजबूत

उत्तर प्रदेश की बिजली व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव आने वाला है। उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPPCL) ने प्रदेश के झांसी जिले में एक विशाल बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) लगाने की योजना बनाई है। यह प्रोजेक्ट न सिर्फ प्रदेश की बिजली आपूर्ति को अधिक स्थिर बनाएगा, बल्कि नवीकरणीय ऊर्जा (सौर ऊर्जा) के बेहतर उपयोग में भी मील का पत्थर साबित होगा।

इस ब्लॉग पोस्ट में हम आपको इस ऐतिहासिक प्रोजेक्ट से जुड़ी हर जरूरी जानकारी जैसे कि प्रोजेक्ट की लोकेशन, क्षमता, इसमें शामिल कंपनियां, टैरिफ और इसके फायदों के बारे में आसान टेबल फॉर्मेट में बता रहे हैं। तो आइए, जानते हैं इस मेगा प्रोजेक्ट के बारे में पूरी डिटेल।


प्रोजेक्ट का संक्षिप्त विवरण

सबसे पहले इस प्रोजेक्ट से जुड़ी बुनियादी जानकारी पर एक नजर डाल लेते हैं।

प्रमुख बिंदु (Key Point)विवरण (Details)
परियोजना का नामस्टैंडअलोन बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS)
स्थान (Location)400 केवी / 220 केवी गरौठा सबस्टेशन, झांसी, उत्तर प्रदेश
भूमि क्षेत्रफलउप्र पावर ट्रांसमिशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPPTCL) की लगभग 30 एकड़ भूमि
कुल क्षमता250 मेगावाट (एमडब्ल्यू) / 1000 मेगावाट आवर (एमडब्ल्यूएच)
डिस्चार्ज क्षमतापूरी क्षमता पर लगातार 4 घंटे तक बिजली आपूर्ति
कार्यान्वयन मॉडलबिल्ड, ओन, ऑपरेट, एंड ट्रांसफर (बीओओटी)
अनुबंध अवधि15 वर्ष (बैटरी एनर्जी स्टोरेज सप्लाई एग्रीमेंट – बीईएसएसए)
कार्यान्वयन एजेंसीएनटीपीसी विद्युत व्यापार निगम (एनवीवीएन)
पूरा होने की समय-सीमाअनुबंध पर हस्ताक्षर के बाद 18 महीने
वित्तीय सहायतानवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) की वायबिलिटी गैप फंडिंग (वीजीएफ) योजना

परियोजना में शामिल डेवलपर कंपनियां और टैरिफ (Developers & Tariff)

इस मेगा प्रोजेक्ट को दो कंपनियां मिलकर विकसित करेंगी। इनके नाम और टैरिफ की जानकारी नीचे दी गई है:

क्रम सं.डेवलपर कंपनी का नामआवंटित क्षमताप्रति यूनिट टैरिफ (लगभग)
01सनश्योर एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड125 मेगावाट / 500 मेगावाट आवर₹6.64 प्रति kWh
02एनेरिका इंफ्रा 3 प्राइवेट लिमिटेड125 मेगावाट / 500 मेगावाट आवर₹6.65 प्रति kWh

कुल मासिक टैरिफ: बिजली नियामक आयोग (UPERC) ने इन कंपनियों के लिए क्रमशः ₹3,59,000 प्रति मेगावाट प्रति माह और ₹3,59,999 प्रति मेगावाट प्रति माह की दर को भी मंजूरी दी है।


क्या है यह प्रोजेक्ट और इसकी खासियत? (What is this Project?)

1. इंडिया का पहला ‘कम्पोजिट मॉडल’

यह परियोजना इस मायने में ऐतिहासिक है कि यह भारत का पहला यूटिलिटी-स्केल ‘कम्पोजिट मॉडल’ है। इस मॉडल में, बैटरी को चार्ज करने की जिम्मेदारी खुद डेवलपर की होगी। डेवलपर को यह बिजली अंतर-राज्यीय या राजकीय ट्रांसमिशन सिस्टम से नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से लेनी होगी ताकि वीजीएफ का लाभ मिल सके।

2. शेड्यूल करने योग्य बिजली

इस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यूपीपीसीएल इस स्टोरेज बिजली को अपनी जरूरत के हिसाब से शेड्यूल कर सकेगा। खासतौर पर शाम के पीक आवर्स (जब सौर ऊर्जा उपलब्ध नहीं होती, लेकिन मांग चरम पर होती है) के दौरान इसे 1-2 स्लॉट में डिस्चार्ज किया जा सकेगा।

3. उपभोक्ता हित में सुरक्षा उपाय

अनुबंध में एक अनोखा “मार्केट गेन-शेयरिंग मैकेनिज्म” भी शामिल है। यदि स्टोरेज की गई अतिरिक्त बिजली को बाजार में ऊंचे दामों पर बेचा जाता है, तो उस मुनाफे को यूपीपीसीएल और डेवलपर के बीच 50:50 के अनुपात में बांटा जाएगा


उत्तर प्रदेश के बिजली सिस्टम पर क्या होगा असर? (Impact on UP’s Power Sector)

यह बैटरी स्टोरेज प्रोजेक्ट उत्तर प्रदेश की बिजली व्यवस्था को कई तरह से मजबूत और आधुनिक बनाएगा।

प्रभाव (Impact)विवरण (Description)
पीक डिमांड की पूर्तिउत्तर प्रदेश की बिजली मांग 30 गीगावाट के पार पहुंच चुकी है। यह प्रोजेक्ट शाम के समय बढ़ने वाली इस मांग को पूरा करने में अहम भूमिका निभाएगा।
नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावासौर ऊर्जा की सबसे बड़ी चुनौती इसकी अनियमितता (दिन में उपलब्ध, शाम को नहीं) है। बैटरी स्टोरेज दिन की अतिरिक्त सौर ऊर्जा को स्टोर करके शाम को सप्लाई करेगा, जिससे ग्रीन एनर्जी का अधिकतम उपयोग हो सकेगा।
ग्रिड स्थिरतायह सिस्टम ग्रिड की फ्रीक्वेंसी को नियंत्रित रखने, डीएसएम (डिमांड साइड मैनेजमेंट) का अनुपालन करने और महंगे शॉर्ट-टर्म बाजार पर निर्भरता कम करने में मदद करेगा।
ट्रांसमिशन लॉस में कमीचूंकि यह प्रोजेक्ट राज्य के अंदर ही स्थित है, इसलिए बाहर से बिजली मंगाने पर होने वाले ट्रांसमिशन लॉस में भारी कमी आएगी और ग्रिड कंजेशन (भीड़) से भी राहत मिलेगी।
दूसरे राज्यों के लिए टेम्पलेटयह कम्पोजिट मॉडल देश के अन्य राज्यों के लिए एक उदाहरण पेश करता है कि कैसे बैटरी स्टोरेज को ग्रिड का एक विश्वसनीय और शेड्यूल करने योग्य हिस्सा बनाया जा सकता है।

महत्वपूर्ण लिंक और अन्य जानकारी:

लिंक का विवरणविवरण
संबंधित निकायउत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPPCL), एनटीपीसी विद्युत व्यापार निगम (NVVN)
अधिक जानकारी के लिएUPPCL की आधिकारिक वेबसाइट या नवीनतम समाचार पोर्टल्स पर विजिट करें।

निष्कर्ष: झांसी का यह 250 मेगावाट का बैटरी स्टोरेज प्रोजेक्ट उत्तर प्रदेश के ऊर्जा इतिहास में एक नए अध्याय की शुरुआत है। यह न केवल प्रदेश की बढ़ती बिजली मांग को पूरा करेगा, बल्कि स्वच्छ और हरित ऊर्जा के भविष्य को भी सुरक्षित करेगा। यह परियोजना दिखाती है कि कैसे उत्तर प्रदेश तकनीकी रूप से उन्नत और उपभोक्ता-केंद्रित बिजली व्यवस्था की ओर अग्रसर है।

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(Disclaimer: यह ब्लॉग पोस्ट विभिन्न समाचार रिपोर्ट्स और UPPCL द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। नवीनतम अपडेट के लिए कृपया आधिकारिक स्रोतों से संपर्क करें।)

Anshu Sachan

Anshu Sachan

Anshu Sachan एक सूचना-आधारित लेखक हैं, जो UPPCL और बिजली विभाग से जुड़ी योजनाओं व उपभोक्ता जानकारी को सरल भाषा में प्रस्तुत करते हैं। उनका उद्देश्य उपयोगकर्ताओं को सही और भरोसेमंद जानकारी तक पहुँचने में सहायता करना है।

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